Lalquila
hamare desh ki pehchan,ek sabhyata ka prateek,ek misaal Ek waqt thja jab mugalo ne ne isey apni satta ka kendra banaya aur baad main angrezo ney, aur ab ye hindustan ke loktantra ka prateek hai....
Friday, June 6, 2008
हत्यारा
गुर्जर आन्दोलन में जो हुआ उसका किसको पता था हाँ शायद ये होना भी था क्यूंकि इस की एक वजह जो मुझ को समझ आती है वो ये की शायद अब गुर्जरों को इन कुर्बनिओं के बाद एक नेता मिला हैं एक अर्से के बाद । पहले एक और सूर्यवंशी का उदय हुआ था नाम था कैप्टेन राजेश पायलट और अब कर्नल बैंसला , गुर्जरों को लगा की अब उन्हें उनका पैरोकार मिला है जो उनकी समस्याओं को दूर करेगा पर शायद वो लोग इस सच से नही बच सकते की जिन्होंने इस आन्दोलन को बढ़ने मैं अपना बलिदान दिया है उनका क्या ? क्या उनका बलिदान काम आएगा ? या फिर एक और नेता बन कर कोई उनकी मौत का फयेदा उठाएगा , और शायद ये एक कड़वा सच भी है की राजनीती मैं सब कुछ जायज़ है पता नही कौन कब कहा से उठ खड़ा हो और अपने को जन आन्दोलन का प्रतीक घोषित कर दे । ये कोई मजाक नही है क्योंकि ये पहले भी होता रहा है की जन आन्दोलन के नाम पर नेता बनते है और फिर उसी की दुहाई देकर राजनीती मैं प्रवेश पा जाते हैं और लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते है वोट बैंक की राजनीती करते हैं । पर मैं पूछता हूँ की लोगों की भावनाओं का कातिल कौन है कौन है हत्यारा .......
सच से दूरी और चापलूसी
न जाने क्यों हिन्दुस्तानीयों में सच का सामना करने की हिम्मत नहीं होती है ऐसा मेरा ख्याल हैं क्योंकी इसकी भी एक वजह और वो वजह शायद आप भी जानते हैं .चापलूसी इस देश के लोगों की फितरत सी हो गयी है क्योंकि उन्हे आगे बढ़ना है जिसके लिए वो किसी भी काम को करने के लिए तैयार होते है और उसके लिए उपयोग मैं एक शब्द आता हैं 'बॉस इज औल्वयेस राईट'पर शायद मैं इस कहावत को चापलूसों का हत्यार मानता हूँ और इसे नकारता हूँ क्योंकि सफलता तो मिलेगी ही आज नही तो कल , हाँ पर ये हो सकता है की आपको इसके लिए और महनत करनी पडे और ताने भी सुनने पड़ें ,और ये ही आपकी परीक्षा है .
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