hamare desh ki pehchan,ek sabhyata ka prateek,ek misaal Ek waqt thja jab mugalo ne ne isey apni satta ka kendra banaya aur baad main angrezo ney, aur ab ye hindustan ke loktantra ka prateek hai....
Friday, June 6, 2008
सच से दूरी और चापलूसी
न जाने क्यों हिन्दुस्तानीयों में सच का सामना करने की हिम्मत नहीं होती है ऐसा मेरा ख्याल हैं क्योंकी इसकी भी एक वजह और वो वजह शायद आप भी जानते हैं .चापलूसी इस देश के लोगों की फितरत सी हो गयी है क्योंकि उन्हे आगे बढ़ना है जिसके लिए वो किसी भी काम को करने के लिए तैयार होते है और उसके लिए उपयोग मैं एक शब्द आता हैं 'बॉस इज औल्वयेस राईट'पर शायद मैं इस कहावत को चापलूसों का हत्यार मानता हूँ और इसे नकारता हूँ क्योंकि सफलता तो मिलेगी ही आज नही तो कल , हाँ पर ये हो सकता है की आपको इसके लिए और महनत करनी पडे और ताने भी सुनने पड़ें ,और ये ही आपकी परीक्षा है .
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1 comment:
sahi kaha hai. safalta milegi zarur... der se hi sahi.
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